चुनाव से पहले बिहार के इस दिग्गज नेता ने बढ़ा दी तेजस्वी की टेंशन, राजद की बढ़ सकती हैं मुश्किलें…

बिहार : दीपांकर भट्टाचार्य ने कहा कि राष्ट्रीय जनता दल (राजद) 2015 के विधानसभा चुनाव (Assembly elections) की तर्ज पर सीट बट्बारे (Seat sharing) का मसला हल करना चाहता है जो भाकपा माले (CPI Male) को मंजूर नहीं है.भाकपा माले के महासचिव ने कहा कि सीट बट्बारा 2020 लोकसभा चुनाव की तर्ज पर होनी चाहिए.


उन्होंने कहा कि अगर गठबंधन नहीं होता है तो उनकी पार्टी अकेले चुनाव लड़ने का फैसला लेगी. दीपांकर भट्टाचार्य ने कहा कि हमारी बस यही मांग है कि लोकसभा चुनाव में हुए तालमेल को आधार माना जाए, तो हमें भी गठबंधन में रहना मंजूर होगा.

वरना, हम भी अकेले चुनाव लड़ेंगे. जहां तक वामदलों के आपसी सहयोग की बात है, हम तीनों साथ में चुनाव लड़ेंगे. दीपांकर भट्टाचार्य की मेहनत का नतीजा बिहार पिछले विधानसभा चुनावों में देख चुका है. पिछले चुनाव में लेफ्ट पार्टियों ने एक गठबंधन के तौर पर चुनाव लड़ा था. फिर भी जहां सीपीआई और सीपीआईएम का खाता नहीं खुला वहीं सीपीआई (एमएल) ने तीन सीटें अपने नाम कर ली थीं. माना जाता है कि लेफ्ट पार्टियों को एक करने के पीछे भी दीपांकर भट्टाचार्य ने काफी मेहनत की थी.

बता दें कि 2015 के बिहार विधानसभा चुनावों में सीपीआई (एमएल) और सीपीआई ने 98 सीटों पर चुनाव लड़ा था जबकि सीपीएम ने 38 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे. दीपांकर की मेहनत ही थी कि जब चुनाव परिणाम आए तो सीपीआई (एमएल) बिहार में सबसे बड़ी वामपंथी पार्टी के तौर पर उभरी जिसे 1.5% वोट शेयर हासिल हुए थे. सीपीआई (एमएल) ने बलरामपुर, दरौली और तरारी सीट पर अपनी जीत दर्ज कराई थी.

महागठबंधन में शामिल दल अब भी दावा कर रहे हैं कि सबकुछ ठीक हो जाएगा.राजद और कांग्रेस जहां सबकुछ जल्द ठीक हो जाने का दावा कर रही है वहीं, जेडीयू ने कहा है कि लालू प्रसाद अपने सहयोगियों को लेकर कभी इमानदार नहीं रहे. अंतिम समय मे सीट बंटवारा करते हैं और मनमुताबिक सीट देते हैं.

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