देश : आजादी के बाद 1955 में पहली बार पटना के गांधी मैदान में रावण वध का कार्यक्रम शुरू हुआ ,आजादी से पहले पंजाब से पटना सिटी आए गांधी परिवार के लोगों ने इसकी शुरुआत की बक्शी राम गांधी और राधा कृष्ण मल्होत्रा ने स्थानीय लोगों के सहयोग से रावण वध समारोह की शुरुआत की गई थी. पहले छोटे पैमाने पर समारोह हुआ लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता गया यह समारोह व्यापक होता गया अब तो दो से तीन लाख लोग रावण वध देखने जुटते हैं.


5 साल पहले रावण वध समारोह के दौरान अचानक भगदड़ मचने से 40 से अधिक लोगों की मौत हो गई थी शहर के अलावा आसपास के गांवों से भी लोग गांधी मैदान पहुंचते थे.

इस बार गांधी मैदान में रावण वध समारोह के लिए प्रशासन से अब तक अनुमति नहीं मिली है और कोरोनावायरस में अगर अनुमति नहीं मिली तो 12 साल के बाद रावण बद की परंपरा एक बार फिर से टूट जाएगी इससे पहले 2008 में कोसी बाढ़ के कारण आयोजन को रद्द कर दिया गया था.

इस की ज्यादा संभावना है कि इस बार समारोह के साथ रामलीला भी वर्चुअली किया जाएगा दशहरा कमेटी ट्रस्ट ने जिला प्रशासन और प्रमंडलीय आयुक्त को पत्र लिखकर आयोजन के संदर्भ में मार्गदर्शन मांगा है कमल ने बताया कि पत्र दिए हुए 10 दिन से अधिक हो गए हैं पर अभी तक जवाब नहीं आया है सोमवार को डीएम और कमिश्नर से मिलने की कोशिश की जाएगी उसके बाद यह पता चलेगा कि इस बार आयोजन होगा या नहीं और अगर होगा तो उसका स्वरूप क्या होगा ,पिछले साल भी पटना में भारी बारिश के कारण कई मोहल्लों में भीषण जल जमाव के कारण समारोह फीका पड़ गया था और लोगों की भीड़ कम जुटी थी.

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